Posts

Showing posts from June, 2025

बब्लू बंदर की मस्ती

Image
बब्लू बंदर की मस्ती बहुत समय पहले की बात है जंगलपुर में बब्लू नाम का एक शरारती बंदर रहता था। उसकी सबसे बड़ी आदत थी दूसरों को परेशान करना। अगर कोई जानवर पानी पी रहा होता तो बब्लू चुपके से पीछे जाकर " भौं " कर देता था। जिससे पीने वाला डर के मारे पानी में गिर जाता था। और ये बब्लू को करने में बड़ा मजा आता था। और हंसते हंसते पेड़ पर चढ़ जाता था। बब्लू दिन भर सिर्फ शरारत ही करता रहता था। बब्लू को किसी की मदद करना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था। वह सोचता था कि मदद करना सबसे बोरिंग काम होता है। एक दिन वह अकेले ही पेड़ पर बैठ के केला खा रहा था। तभी अचानक हवा में चमकदार रोशनी हुई और एक रहस्यमयी आवाज गूंजी, " बब्लू ! ये लो जादुई केला " बब्लू हैरान हो गया , और देखा कि उसके सामने एक सुनहरा पीला चमकता हुआ केला हवा में लटक रहा है। उसने सोचा पर ये आवाज कहा से आई । आसपास देखा तो कोई भी नहीं दिखाई दे रहा था। फिर उसने इस बात पर ज्यादा न सोचते हुए कहा – मुफ्त का जादुई केला! जरूर ही कुछ मजेदार होगा। उसने फौरन ही केला खा लिया। जैसे ही बब्लू ने केला खाया , आवाज फिर आई " अब तुम सुपर हे...

दादी मां की सीख – जैसी सोच वैसी स्थिति

Image
दादी मां की सीख – जैसी सोच वैसी स्थिति  एक बार की बात है , एक छोटे से सुंदर गांव मै अर्जुन नाम का लड़का रहता था , अर्जुन पढ़ाई मै बहुत अच्छा था । वह प्रतिदिन स्कूल जाता था । लेकिन उसमें एक बुरी आदत थी कि वह किसी भी बात के बुरे पहलू को ही देखता था , उसके दिमाग मै केवल नकारात्मक विचार ही आते रहते थे । जिसकी वजह से अर्जुन खूब परेशान भी रहता था । अगर बादल घिरे तो वह कहता कि अब तो बारिश होगी और मै बाहर भी खेल पाऊंगा । अगर टीचर ने सवाल पूछ लिया तो सोचता कि मै जवाब नहीं दे पाऊंगा तो लोग मजाक उड़ाएंगे मेरा , घर पे की मेहमान आता तो सोचता कि अब तो मेरा टीवी देखने का टाइम भी चला जाएगा । इन्हें नहीं आना चाहिए था। अर्जुन की यह सोच धीरे धीरे उसकी दुनिया वैसा ही बना रही थी – उदास ओर निराशा पूर्ण। एक दिन दादी ने अर्जुन को bulaya ओर कहा बेटा तुम्हे एक जादुई किताब दिखाती हु । इसमें जैसा tm सोचोगे wo सच ho जायेगा । अर्जुन की आँखें चमक गई सच मै दादी ? दादी मुस्कुराई और बोली है लेकिन ये किताब कही बाहर नहीं तुम्हारे दिमाग मै ही है । इसका नाम है सोच , जैसा सोचेंगे वैसा ही बन जाओगे । इसलिए हमेशा सकारात्म...

लालच बुरी बला

Image
लालच बुरी बला बहुत समय पहले की बात है। एक सुंदर और शांत गांव में जिसका नाम रामपुर था,  में राजू नाम का एक गरीब किसान रहता था। राजू मेहनती, ईमानदार, और संतोषी स्वभाव का था। उसके पास थोड़ी सी जमीन थी जिसने वह अनाज और सब्जियां उगाकर किसी तरह अपना गुजारा करता था। गांव के लोग उसे पसंद करते थे क्योंकि वह कभी किसी से ईर्ष्या नहीं करता था। और हमेशा मुस्कुरा के बात करता था। एक दिन की बात है, राजू अपने खेत में हल चला रहा था। सूरज सिर पर था और गर्मी अपने चरम सीमा पर थी। तभी उसके हल का फाल किसी सख्त चीज से टकराया। राजू ने वही खुदाई शुरू कर दी और कुछ ही देर में एक चमचमाता पीले रंग का पीतल का बर्तन निकला। वह हैरान हो गया बर्तन नया नया सा लग रहा था जैसे किसी ने अभी अभी उसे रखा हो। राजू ने बर्तन उठाया और उसमें देखा कि एक चिट्ठी रखी हुई थी। चिट्ठी में लिखा था " यह कोई साधारण बर्तन नहीं है यह हर सुबह एक सोने का सिक्का देगा, लेकिन एक शर्त है –सिक्का मांगते हुए मन में लालच, ईर्ष्या, द्वेष ऐसी भावनाएं नहीं होनी चाहिए जो सिक्का मिले उससे जरूरत मंदो को मदद करना तथा उस सिक्के का गलत उपयोग नहीं करना होगा।...